Wednesday, July 23, 2008
सड़क, डी पी आर और ऍम बी
अभी पिछले महीने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की सडकों के निरीक्षण के सिलसिले मे यू पी के एक नक्सल प्रभावित जनपद मैं जाना हुआ। बातचीत के दौरान पी आई यू के ई ई साहेब ने बताया की हमारे जनपद में एक समस्या यह देखी जा रही है की सड़कों की डी पी आर और ऍम बी तो आपस में मिलती हैं लेकिन बनने वाली सड़क या बनी हुई सड़क न तो डी पी आर से मिलती है और न ही ऍम बी से । जब मैंने उनसे अपने अनुभव बांटे तो निष्कर्ष यह निकला कि सड़कों की डी पी आर ऐसे लोंगो द्वारा बनाई या बनवाई जाती है जिन्होंने कभी सड़क ख़ुद से बनवाई तो नहीं , हाँ bantee हुई जरूर देखी है। कभी कभी तो डी पी आर ऑफिस में ही bana दी जाती है कुछ वैसे ही जैसे भारत की khetee से sambandhit yoznai दिल्ली के vatakoolinit kamron में ही बन जाती है। इसकी एक वजह शायद यह भी है कि हमारा किसी भी कार्य के प्रति नज़र nazareeya professional नही है। हमारा dristikon हर कार्य के लिए है "सब चलता है "। एक बार डी पी आर banne के बाद उसका बिना site verification के ही धन दे दिया zata है। धन मिलने के बाद उसका kharch होना zaroore हो jata है, इस लिए डी पी आर और ऍम बी आपस में मिलती हैं। किसी भी योजना के लिए यह zaroore है कि उसका डी पी आर professionals के द्वारा banayee गयी हो क्यों कि किसी भी योजना की safalta की yahee buniyad होती है.
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1 comment:
Nice Blog.
पाखी की दुनिया में "बाइकिंग विद् पाखी" http://pakhi-akshita.blogspot.com/
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